संक्षिप्त विवरण
वे हिमालय के कुछ सबसे विशिष्ट वन क्षेत्र हैं. 7,800 मीटर ऊँची नंदा देवी शिखर के अंतर्गत, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान दुर्गम पहुँच होने के कारण अब भी सुरक्षित बचा है. यहाँ पर कई दुर्लभ स्तनपाईयों, विशेष हिम चीता, हिमालयी कस्तूरी मृग और भारल का निवास है. फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इसके स्थानीय पर्वतीय फूलों के मैदान और उत्कृष्ट प्राकृतिक सुंदरता के जाना जाता है, और यह एशियाई काला भालू, हिम चीता, भूरा भालू और नीली भेड़ सहित दुर्लभ और विलु्प्तप्राय जंतुओं का निवास स्थान भी है. ये सब मिलकर स्वर्गोपम और अद्भुत हिमालय की श्रृंखलाओं का एक ऐसा संधि क्षेत्र बनाते हैं, जो पर्वतारोहियों और वनस्पतिशास्ित्रयों द्वारा और हिंदू पुराणों में लंबे समय से सराहा जाता रहा है.
अभिलेख की प्रामाणिकता
मापदंड (iii): फूलों की घाटी एक अत्यंत सुदंर, ऊँचाई पर स्थित हिमायली घाटी है और एक शताब्दी से भी अधिक समय से पर्वतारोहियों और वनस्पतिशास्त्रियों द्वारा पुस्तकों में प्रसिद्धि प्राप्त है और हिंदू पुराणों में लंबे समय से ख्यातिप्राप्त है. यह एक सुरम्य लैंडस्केप है, पर्वतीय फूलों के सुंदर मैदान हैं और यहाँ पहुँच कर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के आंतरिक बेसिन के ऊँचे-नीचे पर्वतीय जंगलों की दुरूहता की सारी थकान दूर हो जाती है.
मापदंड (iv): फूलों की घाटी इसके विभिन्न पर्वतीय वनस्पतियों के कारण अंतर्राष्ट्रीय रूप से महत्त्वपूर्ण है, यह पश्चिमी हिमालय जैवभूगोलीय क्षेत्र है. घाटी में वनस्पतियों की प्रजातियों की विभिन्नता उस स्थान को प्रतिबिंबित करती है जो स्वर्गोपम और अद्भुत हिमालय पर्वतमाला के उत्तरी से दक्षिणी भाग के बीच है, और पूर्वी और पश्चिमी हिमालय वनस्पति के बीच है. बहुत सी पादप प्रजातियाँ अंतर्राष्टरीय रूप से ख़तरे में है, अनेक उत्तरांचल के अलावा कहीं भी नहीं पाई गईं हैं और दो प्रजातियाँ नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान में नहीं पाई गईं हैं. यहाँ पर दुर्लभ और विलुप्तप्राय औषधीय प्रजातियों की विभिन्नता भी भारतीय हिमालय के अन्य संरक्षित क्षेत्र से कहीं अधिक है. संपूर्ण नंदा देवी जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र पश्चिमी हिमालय एंडेमिक बर्ड एरिया (EBA) अर्थात् स्थानिक पक्षी क्षेत्र में स्थित है. शिकार के लिए निषिद्ध पक्षी प्रजातियाँ ईबीए के इस भाग में स्थानिक रूप से हैं.
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