संक्षिप्त विवरण
हिमालय की निचली पहाड़ियों के ढलान पर, जहाँ वनाच्छादित पहाड़ी घास के जलोढ़ मैदानों और उष्णकटिबंधीय वनों की राह बनाती है, वहाँ विभिन्न वन्यजीवों का आवासस्थल मानस अभयारण्य है, यहाँ बहुत सी विलुप्तप्राय प्रजाति जैसे बाघ, बौने सूअर, गैंडे और हाथी पाए जाते हैं.
स्थल के लिए ख़तरे:
जब असम में बोडो आदिवासी लड़ाकों की घुसपैठ हुई, तब 1992 में समिति ने इसे संकटग्रस्त वैश्विक धरोहर सूची में शामिल किया. इस अभयारण्य की क्षति का आकलन बीस लाख अमेरिकी डॉलर से भी अधिक का किया गया है. 1992-1993 के दौरान अभयारण्य की अधोसंरचना में उल्लेखनीय क्षति हुई. राजनैतिक अस्थिरता के कारण मृत जानवरों की तस्करी में 1989-1992 के दौरान तैंतीस गैंडे शामिल हैं. 1997 में भारत सरकार और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर ने संयुक्त रूप से एक निगरानी मिशन प्रारंभ किया इस मिशन ने सुनिश्चित किया कि उद्यान अधोसंरचना में अत्यधिक क्षति हुई है और कुछ प्रजातियों, विशेष रूप से एक सींग वाले गैंडे की संख्या में कमी आई है.
भारत सरकार, असम राज्य सरकार, और उद्यान प्राधिकार इसके लिए 2350 लाख अमेरिकी डॉलर की पुनर्वास योजना बनाई है जिसे 1997 में लागू प्रारंभ किया गया और यह संतोषजनक रूप से प्रगति पर है. और जब मानस में और उसके आसपास सुरक्षा स्थितियाँ सुधर चुकी हैं, असम में विद्रोहियों की भय अब भी है और लड़ाके अभयारण्य में प्रवेश कर जाते हैं. फिर भी, स्थल की सुरक्षा और स्थानीय ग्रामवासियों से संबंध सुधर रहे हैं.
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